Posts

Showing posts from April, 2024

कंपनी नहीं दे रही सैलरी, पीएफ तो इन तरीकों से अपना पैसा ले सकते हैं आप

कंपनी ऐसी होती हैं, जो इम्प्लॉई को रिक्रूट तो कर लेती हैं लेकिन उन्हें समय पर पेमेंट नहीं देतीं। कुछ पीएफ डिडक्ट नहीं करतीं। जबकि कानून के मुताबिक एक तय टाइम लिमिट में सैलरी से लेकर पीएफ देना तक जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर आप संबंधित कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।  सैलरी न मिले तो क्या करें > सबसे पहले ऐसे लॉयर जो इस तरह के मामले देखता हो, उनके जरिए इम्प्लॉयर को लीगल नोटिस भेज सकते हैं।  > फिर भी कंपनी सैलरी नहीं दे रही तो पुलिस में इसकी शिकायत कर सकते हैं। हालांकि ऐसे अधिकांश मामलों में पुलिस की तरफ से पुख्ता कार्रवाई नहीं हो पाती।  > ऐसा होन पर आप लेबर कमिशनर को इसकी शिकायत कर सकते हैं।  > यदि कमिशनर ऑफिस से भी आपकी समस्या का समाधान नहीं होता तो आप कोर्ट जा सकते हैं। कोर्ट में आप इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट, 1947 के सेक्शन 33 (C) के तहत केस कर सकते हैं।  कैसे क्लेम कर सकते हैं  > यदि इम्प्लॉयर की तरफ से सैलरी रोकी गई है तो इम्प्लॉई खुद या अथॉराइज्ड पर्सन के जरिए मनी के लिए क्लेम कर सकता है।  > यदि इम्प्लॉई की डेथ हो जाती ...

ESIC स्कीम के क्या हैं फायदे, कौन लगा सकता है पैसा; किसे होगा अधिक मुनाफा

Image
  नई दिल्ली। इम्पलॉय स्टेट इंश्योरेंस स्कीम ऑफ इंडिया (ESIC) एक बहुआयामी सामाजिक सुरक्षा योजना है। इसे कर्मचारियों को सामाजिक-फाइनेंशियल सिक्योरिटी देने के लिए डिजाइन किया गया है। इस योजना को एम्पलॉय स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेट के ऑपरेट करता है। यह कर्मचारियों को बीमारी, मैटरनिटी, विकलांगता और मृत्यु से बचाता है। इस स्कीम में कर्मचारी के साथ ही उनके परिवार भी शामिल होते हैं। ईएसआईसी में कौन आवेदन कर सकता है? 1 जनवरी 2017 से वही कर्मचारी इस स्कीम में शामिल हो सकते हैं जिनकी सैलरी 21,000 रुपए (प्रति माह) है। कर्मचारियों को ईएसआईसी स्कीम में एनरॉल करने की जिम्मेदारी कंपनी की होती है। इसमें कर्मचारी के वेतन से कुछ फिक्स राशि जमा की जाती है। इस स्कीम में बिना किसी भेदभाव के सभी को लाभ दिया जाता है। इस स्कीम के बेनिफिट मेडिकल बेनिफिट : जैसे ही कर्मचारी इस स्कीम में शामिल होता है, वो और उसका पूरा परिवार इस स्कीम का लाभ उठा सकता है। मेडिकल ट्रीटमेंट पर किसी भी प्रकार की कोई लिमिट नहीं है। 120 रुपए के सालाना प्रीमियम के भुगतान पर, रिटायर्ड और विकलांग व्यक्ति और उनके जीवनसाथी को भी इस स्कीम क...

PF अकाउंट से ऑनलाइन पैसे कैसे निकालें और पीएफ निकासी के नियम

Image
  EPF अकाउंट में जमा राशि को आंशिक रूप से या पूरी तरीके से निकाला जा सकता है, इसे पीएफ निकासी भी कहते हैं। जब कर्मचारी रिटायर हो जाता है या लगातार 2 महीने से अधिक समय तक बेरोजगार रहता है, उस स्थिति में ईपीएफ राशि को निकाला जा सकता है। वहीं, मेडिकल इमरजेंसी, शादी, होम लोन भुगतान जैसी परिस्थितियों में भी कुछ शर्तों के तहत इस फण्ड में जमा राशि के कुछ हिस्से को निकाला जा सकता है। आप ईपीएफ विड्रॉल फॉर्म ऑनलाइन भरकर पैसे निकालने का क्लेम कर सकते हैं। हालांकि, आप EPF अकाउंट से ऑनलाइन भी पैसे निकाल सकते हैं, बशर्ते आपका आधार आपके UAN से जुड़ा होना चाहिए। ईपीएफ अकाउंट से पैसे निकालने (EPF Withdrawal) की प्रक्रिया के बारे में जानकारी के लिए इस लेख को पढ़ें। EPF अकाउंट से पैसे निकालने की ऑनलाइन प्रक्रिया ईपीएफ से पैसा ऑनलाइन निकालने के लिए आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपका UAN एक्टिव है और यह आपके KYC (आधार, पैन और बैंक अकाउंट) से लिंक है। यदि आप इस शर्त को पूरा करते हैं, तो आप अपने EPF अकाउंट से पैसे निकलने के लिए नीचे दी गई प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं। स्टेप 1 – अपने UAN और पासवर्ड के सा...

58 की बजाय 60 साल के होने पर लेंगे पेंशन तो मिलेगा ज्‍यादा पैसा, जानिए क्‍यों?

Image
दिल्‍ली. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने अंशधारकों को पेंशन उपलब्‍ध कराता है. किसी अंशधारक को कितनी पेंशन मिलेगी, यह अंशधारक के अंशदान और उम्र पर निर्भर करता है. ईपीएफओ किसी अंशधारक के 58 साल की उम्र पूरी कर लेने और 10 साल तक ईपीएफओ में अंशदान करने पर पेंशन देना शुरू कर देता है. लेकिन, अगर कोई अंशधारक 58 साल की बजाय 60 साल की उम्र में ईपीएफओ से पेंशन लेता है तो उसे ज्‍यादा पेंशन मिलती है. यदि आप 58 की बजाए 60 साल की उम्र में पेंशन लेना शुरू करेंगे तो आपको सामान्‍य पेंशन राशि के मुकाबले 8 फीसदी ज्‍यादा पैसे पेंशन के रूप में मिलेगे. EPFO की ओर से चलाई जाने वाली पेंशन स्कीम है EPS. हर महीने PF खाते में कर्मचारी की बेसिक सैलरी + डीए का 12 फ़ीसदी जमा होता है. एम्प्लॉयर का योगदान भी इतना ही होता है. इसमें से 8.33% राशि कर्मचारी के पेंशन फ़ंड (EPS Fund) में जाती है और बाकी 3.67% की राशि ही PF खाते में जाती है. ईपीएफओ ने एक X पोस्‍ट में पेंशन से संबंधित नियमों के बारे में बताया है. EPFO के नियम के मुताबिक कोई भी कर्मचारी जो ईपीएफओ में अपना कॉन्‍ट्रीब्‍यूशन करता है और उसकी नौकरी को 10 सा...

क्या है ग्रेच्युटी? कैसे कैलकुलेट होती है कर्मचारी को मिलने वाली रकम; जानें सब कुछ

Image
आजकल ग्रेच्युटी (Gratuity) को लेकर चर्चा जोरों पर है. सरकार से जुड़े सूत्रों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि जल्द ही इसके नियमों में बदलाव कर कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर आ सकती है. सरकार इस बात पर चर्चा कर रही है कि ग्रेच्युटी की 5 साल की समय बाध्यता को खत्म कर 1 साल कर दिया जाए. यानी 1 साल भी काम करने पर कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार होगा. अभी ग्रेच्युटी पाने के लिए एक ही कंपनी में कम से कम 5 साल काम करना जरूरी है. ये भी खबर है कि पीएफ (PF) की तरह कंपनी छोड़ने पर ग्रेच्युटी ट्रांसफर का भी प्रावधान किया जाए. ऐसे में बहुत से लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर ग्रेच्‍युटी क्या है? इसे कैसे कैलुक्लेट किया जाता है, इसका फायदा किसको मिलता है? क्या है ग्रेच्युटी एक ही कंपनी में लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारियों को सैलरी, पेंशन और प्रोविडेंट फंड के अलावा ग्रेच्युटी भी दी जाती है. ग्रेच्‍युटी किसी कर्मचारी को कंपनी की ओर से मिलने वाला रिवार्ड होतिा है. अगर कर्मचारी नौकरी की कुछ शर्तों को पूरा करता है तो ग्रेच्‍युटी का भुगतान एक निर्धारित फॉर्मूले के तहत गारंटीड तौर पर उसे दिया जाएगा. ग्रेच्युट...

10 कानूनी अधिकार, जो हर भारतीय कर्मचारी को पता होने चाहिये..

Image
देश में पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर में लाखों लोग नौकरी करते हैं, जिनकी सुरक्षा का जिम्मा कंपनियों का होता है। वहीं कर्मचारियों को भी नियमों का पालन करते हुए अपनी जिम्मेदारियों का वहन करना होता है, लेकिन कर्मचारियों को भारतीय सविंधान के तहत कुछ अधिकार दिए गए हैं, जिनके बारे में हर कर्मचारी को पता होना चाहिए। इनका इस्तेमाल करके वे अन्याय, पक्षपात और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं। आइए जानते हैं इन अधिकारों के बारे में… समान काम के लिए समान वेतन संविधान के तहत, कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन का अधिकार मिला है। इक्वल पेय एक्ट 2010 के अनुसार, पुरुष हो या महिला हर कर्मचारी को समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाएगा। सैलरी देने में कंपनी लिंग, जाति, रंग, उम्र का भेदभाव नहीं कर सकती। ऐसा होने पर कर्मचारी शिकायत कर सकते हैं। काम के घंटे तय करने का अधिकार संविधान के अनुसार, कर्मचारी से एक दिन में ज्यादा से ज्यादा 9 घंटे का काम लिया जा सकता है और 7 दिन में 48 घंटे कर्मचारी काम कर सकते हैं। चाहे वे दुकान में काम करें या किसी कंपनी में, काम के घंटे तय हैं। इस मामले में किसी तरह का भेदभाव...